वक़्त गुज़रा
और कुछ भी तो नहीं बदला
जैसे मेरा आज
मेरे कल मैं है पिघला
देख ज़रा
वहीँ खड़ा है सारा मंज़र
वहीँ खड़ी है मेरी नज़र
जहां तूने छोड़ा था
कहीं कुछ नहीं चला
सिवाय तेरे वायदों के
जो होते तो हैं पर
निभाए नहीं जाते
जो चलते तो हैं पर
कहीं पहुँच नहीं पाते
-शिव
